Posts

बाबुल की चिड़िया

Image
अब बाबुल की चिड़िया  बड़ी हो गई है , अकेले सफर पर  निकल पड़ी है , आज निकली हैं, अपने घोंसले से अकेली  अनजाने लोगों के बीच  नए सफर की शुरुआत हैं, थोड़ा डर है  थोड़ी झिझक है  लेकिन एक नया  आत्मविश्वास है  आप पीछे मुड़ने का  कोई सवाल नहीं  अब आगे कदम बढ़ाते जाना हैं , खुद को आने वाली कठिनाइयों से बचाना है सम्हल सम्हल कर कदम बढ़ाना हैं  सपनों को पूरा  करते जाना हैं  ना झिझकना हैं  ना डरना‌ हैं  बस विश्वास से आगे बढ़ना हैं। हौसला बुलंद रखना है 

बाबुल की चिड़िया

Image
अब बाबुल की चिड़िया  बड़ी हो गई है , अकेले सफर पर  निकल पड़ी है , आज निकली हैं, अपने घोंसले से अकेली  अनजाने लोगों के बीच  नए सफर की शुरुआत हैं, थोड़ा डर है  थोड़ी झिझक है  लेकिन एक नया  आत्मविश्वास है  आप पीछे मुड़ने का  कोई सवाल नहीं  अब आगे कदम बढ़ाते जाना हैं , खुद को आने वाली कठिनाइयों से बचाना है सम्हल सम्हल कर कदम बढ़ाना हैं  सपनों को पूरा  करते जाना हैं  ना झिझकना हैं  ना डरना‌ हैं  बस विश्वास से आगे बढ़ना हैं। हौसला बुलंद रखना है 

मेघा मतलब बादल

Image
 काश ! मैं बादल होती। फिर कही भी कभी भी पहुंच जाती। फिर जब मन करता लंबी सैर पर निकल जाती । कभी खुशी से बरसती , कभी प्रकृति को निहारती , कभी ऊंची उड़ान भरती। बादलों की तरह आसमान में⛅ उड़ना चाहती हूं  बादलों की तरह ऊंचे शिखरों 🏔️को छूना चाहती हूं बादलों की तरह लंबी उड़ान 💫भरना  चाहती हूं बादलों की तरह झूम कर बरसना🌧️  चाहती हूं बादलों की तरह कभी कभी 🌩️गर्जना चाहती हूं बादलों की तरह खुशी में 🌠झूमना चाहती हूं बादलों की तरह दुनिया🌍 की सैर करना चाहती हूं मैं  ☁️मेघा  बादलों  की  तरह बनना  चाहती हूं

काश! मैं लड़का होती

Image
 बेफिक्री से जी पाती  बिना किसी परवाह के  अपने लिए जी पाती  बेखौफ बिंदास सड़कों पर घूम पाती  काश मैं लड़की नहीं लड़का होती फिर अंधेरे का कोई डर नहीं होता फिर पिता के नियमों का कोई बंधन नहीं होता पहनावे का कोई उसूल नहीं होता फिर मेरे पास भी ताकत होती, शक्ति होती और सामर्थ होता और फिर  मेरे पैरो में कोई बेड़ियां नहीं डाल पाता

अब बस....

Image
  आप बस ..... जिंदगी की तकलीफों से निजात पाना चाहती हूं  बहुत हो गई भागा दौड़ी अब मैं आराम चाहती हूं  कब तक यूं ही भागती रहूंगी  जिंदगी में ठहराव चाहती हूं । बहुत हो गया आप पश्चाताप  गलतियों को सुधारना चाहती हूं। किसी पर बोझ नहीं!  सहारा‌ बनना चाहती हूं। बहुत हो गया समझौता अब आने वाले कल को संवारना चाहती हूं । बिना‌‌ डरे  खुलकर हंसना चाहती हूं,  अब बहुत हो गया गैरों के लिए अब खुद के लिए जीना चाहती हूं।।

मेरी पहली कविता

मुझे आज भी याद है मैं कक्षा छठवीं में थी और पहली बार हमें शिक्षक दिवस पर कुछ प्रस्तुत करने का मौका मिला था। समझ नहीं आ रहा था क्या करें ?तो सीनियर्स ने कहा कि कोई कविता सुना दो, किसी मैगजीन वगैरह से देखकर । हमने सोचा चलो कविता ही सुनना है तो खुद लिखकर देखते हैं, तो बस सोचा, तुकबंदी जमाई और कविता बन गई और सच में टीचर्स को बहुत पसंद भी आई । एक मैडम ने तो लिखकर रख ली । एक ने पूछा कि यह कहां से ढूंढी ? हमने कहा खुद लिखी है लेकिन उन्हें यकीन नहीं हो रहा था। पर मजा आया ,कार्यक्रम अच्छा रहा। वह पहला मौका था, जब मैंने मंच पर अपनी प्रस्तुति दी।  तो कविता कुछ इस प्रकार है हम बच्चे है दिल के सच्चे  गुरु हमारे मन में बसते गुरु की राह पर चलकर ही हम देश की रक्षा करते है गुरु को लगते बच्चे प्यारे  हम बच्चे है सबसे न्यारे इस दुनिया में गुरु न होते  तो ये दुनिया कैसी होती गुरुओं के बिन ये दुनिया तो सुनी सुनी सी होती सुनी सुनी सी होती सुनी सुनी सी होती.......

नारी की अस्मिता

Image
कई बार ऐसा लगता है, लड़की होना ही गुनाह है। बचपन से शुरू होती है, एक जंग अपनी अस्मिता को बचाने की। सबसे पहले तो सांसों की जंग कि उसे पैदा होने से पहले ही मार तो नहीं दिया जाएगा? पैदा होने के बाद भी जंग जारी है, यह समाज उसे स्वतंत्रता से जीने देगा या नहीं, जंग आगे भी जारी है , तुम लड़की हो यह एहसास जगाने की, क्योंकि लड़कियां कभी अकेले कहीं नहीं जाती। अकेली लड़की कभी सुरक्षित नहीं होती, चाहे वह खुद के घर में अकेली हो या बाहर। हर बार लड़की को यह जताया जाता है, यह एहसास कराया जाता है कि तुम कमजोर हो, तुम्हें एक मर्द की जरूरत है। बिना मर्द के तुम सुरक्षित नहीं, जबकि वास्तविकता तो यह है कि नर की वजह से ही तो नारी की अस्मिता का हनन हो रहा है। आज यह नौबत ही क्यों आई है कि एक लड़की को हर पल डर सताता रहता है, एक खौफ मन में रहता है, न जाने किस भेष में रावण घात लगाए बैठा है। तो बताओ इसमें गलती किसकी ? लड़की की या उस समाज, वहां के लोगों की , उस सोच की, जो एक अकेली लड़की को सुरक्षित वातावरण नहीं दे सकते। कुछ चंद लोगों की घटिया करतूत की वजह से हमने अपनी बेटियों के पैरों में बेड़िया बांध ...

मेरा परिचय

Image
नमस्कार साथियों !  मै हूँ मेघा मसानिया, मैं कोई लेखक नहीं किंतु लिखने का शौक रखती हूं | साल 2016 में ,  कागज़ और कलम के साथ शुरू हुआ ये सफर अब तक जारी हैं |  जब भी कलम उठाती हूँ तो कुछ ऐसा लिखने की कोशिश रहती हैं कि  जो हृदय की गहराइयों को छू पाएं , जो  दिमाग को सोचने पर मजबूर कर दें, जो कोमल मन के तारों को झंकृत कर दे  | देखा जाएँ तो एक लेखक का कर्तव्य होता हैं मन में उमड़ने वाले भावों के सैलाब को स्याही बनाकर उन्हें कलम के माध्यम से कागज पर उतार दें  |    और ये कोशिश अब भी जारी हैं | मेरा इस ब्लॉग को लिखने का उद्देश्य आपने विचारो को आप सब तक पहुँचाना है , मेरी पूरी कोशिश रहेगी की मैं अपने लेखन से किसी के चेहरे पर मुस्कान ला सकू |  ज़िन्दगी को देखने का मेरा नजरिया मैं अपने ब्लॉग के माध्यम से आपके सामने रख रही हूँ |   कलम की स्याही सूखने ना पाएं ऐसी कोशिश रहेगी,  बस आप सब अपना प्यार और प्रोत्साहन देते रहिएगा |  

सामना करना होगा

Image
संघर्षों का यह दौर है  सामना तुमको करना होगा । संघर्षों का यह दौर है  सामना तुमको करना होगा । आने वाली बाधाओं से  डटकर तुमको लड़ना होगा। दुखों की आंधियों में भी  रुककर तुमको चलना होगा। खुशियों की बहारों में भी सोच समझ कर हंसना होगा । आने वाले भटकावों में संभल-संभल कर बचना होगा।  लालच, ईर्ष्या और बुराई से बचकर तुमको चलना होगा । जन्म मृत्यु शाश्वत सत्य हैं स्वीकार तुमको करना होगा। जीवन की इस सच्चाई का सामना तुमको करना होगा। कर्तव्य पथ पर अडिग होकर  दृढ़ता से तुमको चलना होगा। मेघा मसानिया 

विचार बनाए जिन्दगी

जब तक आप खुद पर भरोसा नहीं करते हो कोई आप पर क्यों भरोसा करेगा इसीलिए पहले खुद को समझो खुद का अवमूल्यन करो फिर आगे कुछ सोचो दूसरों से अपनी तुलना करके आप केवल अपना ही नुकसान करते हैं और कुछ नहीं तुम्हारे यह सोचने से क्या होगा कि दूसरे तुम से आगे निकल जाएंगे यह सोचने से सिर्फ समय बर्बाद होगा क्या तुम दूसरों की तरक्की में बाधक बनना चाहते हो यह सरासर गलत है जब तक दूसरों की खुशी में खुश नहीं होगे तब तक आप दूसरों के लिए अच्छा नहीं सोचते तब तक आप के लिए चीजें अच्छी कैसे हो सकती हैं जीवन में वही कामयाबी हासिल करते हैं जो दूसरों का भला सोचे और करें भी क्योंकि यही प्रकृति का नियम है जैसी भावना जैसी ऊर्जा बाहर की तरफ प्रेषित करेंगे वैसे ही भावनाएं आपकी और आकर्षित होंगे क्योंकि हमेशा उस चीज के बारे में चिंतन करें जिसे आप पाना चाहते हैं चिंतन से वह सकारात्मक ऊर्जा ब्रह्मांड में जाकर लौट कर वापस आपके पास ही आएगी इसीलिए भूल कर भी कभी दूसरों का इतना करें ना बोले ना सोचे दूसरे मेहनत कर रहे हैं तो तुम भी मेहनत करो क्यों बात में जलन ईशा के बाद से ग्रसित होकर मन को दुखी कर रहे हो खुद मेहनत करो भरोसा रखो औ...

संकल्प से सिद्धि

Image
दोस्तों ! ना जाने क्यों हम अपने निर्णय पर अडिग नहीं रह पाते हैं, ना जाने क्यों हम अपनी की गई गलतियों को बार-बार दोहराते हैं, ऐसा एक बार नहीं कई बार होता है । हर बार गलती करना, फिर पश्चाताप ।  कि अगली बार यह गलती नहीं होगी , लेकिन फिर वही दोबारा;  ऐसा सिर्फ आपके साथ ही नहीं,  हर इंसान के साथ होता है। जो स्वयं में बदलाव नहीं ला पाता । दोस्तों ! जीवन ऐसा ही है । जिंदगी है - चलती रहेगी, हार-जीत, उतार-चढ़ाव, आते रहेंगे । हमें चाहिए; कि डटकर इनका सामना करें , हार ना माने । क्योंकि-  " मन के हारे हार है मन के जीते जीत" पर क्या करें ? यह मन बड़ा बावरा है,  मानता ही नहीं । हम हर रोज एक प्प्ज्ञा प्रतिज्ञा  करते हैं कि आज ऐसा करेंगे, आज से एक नई शुरुआत करेंगे लेकिन शाम होते-होते, वह उत्साह, वह उमंग ठंडी पड़ जाती है तो आखिर हमेशा क्या करें ? अपने निर्णय के ऊपर, अपने लक्ष्यों को पर अडिग रह सकें और जीवन में सफलता प्राप्त कर सकें । आइए आज मैं आपको कुछ ऐसे ही शख्सियतों से मिलवा आती हूं जिनके बारे में हम सभी जानते हैं और आज से नहीं बचपन से जानते हैं डॉ एपीजे अब्दुल क...

महत्वाकांक्षी होना जरूरी है

Image
अगर आप जीवन में कुछ बड़ा करना चाहते हो, कुछ पाना चाहते हो, अपने सपनों को हक़ीकत में जीना चाहते हो तो बेशक आपका महत्वाकांक्षी होना जरूरी है। क्योंकि आकांक्षाएँ, अभिलाषाएँ और इच्छाएँ ही वो फ्यूल है जो हमें आगे बढ़ने, मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है। जिस दिन आपकी आकांक्षाएँ ख़त्म हुई, उस दिन जीवन भी थम जायेगा। विकास वही थम जायेगा। इसीलिए जीवन को गतिशील बनाएं रखने के लिए यह जरूरी है कि आप नित प्रति पल, अपनी आकांक्षाओं,  इच्छाओं को सुलगने दे, ये वो अंगारे है जो आपके जीवन के इंजन को गतिशील निरन्तर बनाएं रखती है।                                                                       दोस्तों ! जीवन में पैसा, प्रसिद्धि और सम्मान तो सभी चाहते है लेकिन उनकी कीमत अदा करनी पड़ती है वो है मेहनत, लगन और परिश्रम।  जो ज्यादातर आम इंसान करना नहीं चाहते। लेकिन जो लोग आज सफलता के शिखर पर है, उन...

ज़िद

Image
दोस्तों ये ज़िद ही तो है जो हमसे सब करवाती है। जब तक हम  ज़िद  नहीं करते, तब तक हमारी ख्वाहिशें पूरी नहीं होती। वह  ज़िद ही  होती है, जिसकी बदौलत हम बड़ा मुकाम हासिल कर पाते हैं। ज़िद करनी ही चाहिए लेकिन कैैैसी? ये इस कविता में पढ़िए - ज़िद हैं  तो मुमकिन हैै। ज़िद  है कुछ हासिल करने की। ज़िद हैं कामयाब  बनने की। ज़िद हैं लक्ष्य को पाने की । जिद है कुछ कर गुजर जाने की। जिद है इंसानियत की मिसाल बनाने की। ज़िद हैं  ख्वाहिशों को पंख लगाने की। ज़िद हैं इतिहास रचने की।  ज़िद हैं आजादी की उड़ान की। ज़िद हैं चाहतो को पूरा करने की। ज़िद हैं  अपनी पहचान बनाने की। तो दोस्तो ! जिद्दी बनिए , हौसला बनाए रखिए, और जुट जाइए ख्वाबों को पूरा करने में। बड़े सपने देखिए और उनके पूरा होने में यकीन रखिए लेकिन मेहनत से कोई समझौता नहीं करें, उसका कोई विकल्प नहीं होता। 

जीवन की इस कठिन डगर में हम क्यों विचलित हो जाते हैं

Image
  जीवन की इस कठिन डगर में हम क्यों विचलित हो जाते हैं इतने सारे कर्म हमारे प्रतिदिन हमको उलझाते है ये करुँ या ना करुँ कुछ समझ नहीं हम पाते हैं जीवन की इस कठिन डगर में हम क्यों विचलित हो जाते हैं जीवन का मोल समझे बिना ही कई ख़ुदकुशी कर जाते है जीवन की इस कठिन डगर में हम क्यों विचलित हो जाते हैं नित नए संकल्पो, कर्म बंधन में, हम खुद को उलझा ते है आने वाले की दिन की चिंता में इस पल को व्यर्थ गवाते है जीवन की इस कठिन डगर में हम क्यों विचलित हो जाते हैं ना जाने क्या होगा कल, ये सोच सोच पछताते है जीवन की इस कठिन डगर में हम क्यों विचलित हो जाते हैं विश्राम पतन है लेकिन फिर भी हम थोड़ा सुस्ताते है परिश्रम और मेहनत के बल, यहाँ सब अपना आयाम बनाते है जीवन की इस कठिन डगर में हम क्यों विचलित हो जाते हैं दोस्तों ! जीवन इतना भी कठिन नहीं तुम क्यों इतना घबराते हो चलो उठकर संघर्ष करो ! इस जीवन को सफल बनाते हैं।

कम्फर्ट जोन से बाहर निकले

Image
"सच्ची सफलता के लिए कम्फर्ट जोन से बाहर निकलना बहुत जरूरी है" कोरोना संकट के बीच विपरीत परिस्थितियों में सफलता का सूत्रसुपर-30 के आनंद कुमार के शब्दों में अपनी जिंदगी में परिवर्तन लाना सफलता की सबसे बड़ी कुंजी होती है। स्वयं के अंदर बदलाव लाकर आप सफलता की हर मंजिल हासिल कर सकते हैं। खुद में बदलाव लाना किसी के लिए भी एक बहुत बड़ी चुनौती होती है। दूसरों को सिखाना और दूसरों को बदलना आसान होता है, पर खुद को बदलना बहुत मुश्किल काम है। पर अपनी ताकत और क्षमता से अपने आप को बदल सकते हैं। आप जिस परिवेश में रहते हैं, जैसे लोगों के साथ रहते हैं, उसका आपकी जिंदगी पर काफी प्रभाव पड़ता है। मेरे जीवन पर मां और पिता जी से ज्यादा मेरी दादी का प्रभाव पड़ा। दादी बचपन में मुझसे पूछती थीं की बताओ भगवान ने तुम्हे सबसे बड़ा उपहार क्या दिया, फिर खुद बताती की भगवान ने तुम्हे जो ताकत दी जो क्षमता दी वही सबसे बड़ा उपहार है। दादी फिर पूछती तुम भगवान को सबसे बड़ा उपहार क्या दे सकते हो। मेरे चुप रहने पर कहतीं अपनी ताकत अपनी क्षमता का उपयोग कर एक अच्छा इंसान बनो यही तुम्हारी तरफ से भगवान के लिए सबसे ब...

आजकल की दोस्ती

Image
ये ज़िन्दगी क्या है ! समझ नहीं आता। रोज कोई न कोई नई परेशानी. ये रिश्ते इतने मुश्किल क्यों होते है ? फिर चाहे वो दोस्ती का रिश्ता ही क्यों न हो ? कहते है कि हर रिश्ते को बहुत ही प्यार से सहेजना पड़ता है , अगर एक बार टूट गया तो गांठ पड़ जाती है। फिर भी सब कुछ जानते हुए हम कई बार ये गलती कर बैठते है जिससे रिश्तों  में खटास पड़ जाती है। लेकिन फिर भी हम अपनी गलती को मानने के लिए तैयार नहीं होते।  कारण हम चाहते है कि लोग हमारे मन की बात  समझ जाए। हमारे बिना बोले ही वो हमारी हर जरूरत को पूरा करे। जैसे माँ होती है ना जो बिना बोले ही अपने बच्चों के मन की बात समझ जाती है वैसे ही उम्मीद हम दुनियादारी के रिश्तों से लगा बैठते है। लेकिन माँ तो माँ होती है , उसकी जगह दूसरा कोई नहीं ले सकता। बस इन्हीं छोटी छोटी गलतियों की वजह से हम अपने रिश्तें ख़त्म कर देते है। और जीवनभर पश्चताप की अग्नि में सुलगते रहते है। क्यूंकि बात फिर स्वाभिमान पर आ जाती है कि आखिर पहल करें कौन ? हम क्यों करें गलती उसकी है वो माफी माँगे , और सामने वाला भी यही भावना से पहल नहीं करता फिर धीरे धीरे बोलचाल बंद फि...

हिंदी दिवस

Image
रसों की रानी है हिन्दी संस्कृत की सहेली है हिन्दी  अलंकारों से अलंकृत है हिन्दी छंदों की छाया है हिन्दी संधि-समास का संगम है हिन्दी गद्य-पद्य का‌ मेल है हिन्दी हृदय‌ की अभिव्यक्ति है हिन्दी मेरी प्रिय भाषा है हिन्दी " तू गुरुर हैं मेरा,  तुझसे ही इस देश की शान है।    तुझको मेरा, साष्टांग दंडवत प्रणाम है।। "                  ‌                                   

आपदाएँ कितना कुछ सिखा जाती है...?

Image
 आपदाएँ !!  चाहे वो बाढ़ हो, तूफान हो, या भूकंप प्रकृति का प्रकोप होती है। हम अपना गुस्सा कैसे निकलते हैं वैसे ही प्रकृति भी अपना ग़ुस्सा इन्ही आपदाओं के जरिए निकलती है।  अगर प्रकृति में जुबान होती तो वो शायद ये बयां करती की तुम मनुष्यों ने मुझ पर कितना अत्याचार किया है। कितनी तकलीफ़े दी है कितना दर्द दिया हैं.................   असहनीय वेदना !!                                                                  पर वाह री प्रकृति!  तूने मनुष्यो को सबक सीखने का क्या नायाब तरीका ढूंढ निकाला है। लेकिन तेरी इन आपदाओं ने ना जाने कितने निरपराधों को मौत के घाट उतारा है। प्रकृति हर साल अपने रौद्र रूप में आकर अपनी अहमियत का अहसास करना चाहती है । लेकिन हम अहंकारी मनुष्य आपदाओं के जाते ही सब भूल जाते है और फिर से प्रकृति का दोहन शुरू कर दे...

उड़ान

Image
 घर के आँगन की रौनक, माँ की परछाई, पिता का गुरुर, भाई की कलाई की शोभा आदि न जाने कितनी उपमाएं दी है सबने बेटियों को। हमेशा बेटी को फूल सी नाजुक समझा, माना और बताया। पर बेटी से कभी किसी ने नहीं पूछा की तुझे कौन सी उपमा चाहिए ? बस हमेशा से बेटियों पर हक जताते रहे और क्यों न जताए आख़िर बेटी हो  तुम हमारे घर की।  पर मुझे नहीं पसंद बेटी होने की बंदिश। आज़ाद होना चाहती हूँ इस समाज की जंजीरों से। इस कलिष्ट मानसिकता वाले समाज की सोच से दूर जाना चाहती हूँ। दम घुटता हैं मेरा ! मन करता है सभ कुछ छोड़कर कही चली जाऊं। जहाँ सिर्फ शांति हो और कोई समाज की बंदिश न हो, एक ऐसी दुनिया की तलाश में हूँ जो मेरे हिसाब से मुझे जीने दे।  मुझे इस दुनिया की जंजीरो से आज़ाद होना है। आखिर कब तक यूँ ही सहती रहूंगी, घुटती रहूँगी, तड़पती रहूँगी। अब नहीं होता !!    मुझे बचपन से यही सिखाया गया है कि बेटियाँ हमेशा मर्यादा में रहती है, तुम्हे भी रहना होगा अन्यथा तुम्हे ये समाज चरित्रहीन करार देगा। पर अगर यही काम बेटे करें तो उनकी गलतियों पर पर्दा दाल दिया जाता है।  आखिर ये समाज की कै...

मेरा मुल्क मेरा देश

Image
                                                                                               देश प्रेम  इस देश ने हजारों वर्षों की ग़ुलामी देखी हैं ।  इस देश ने जवानों को रणभूमि में शहीद होते देखा हैं । इस देश ने भूख से बिलखते बच्चों की लाचारी देखी हैं । इस देश ने चंद पैसों के लालच में मानव को दानव बनाते देखा हैं । इस देश ने अपनी आन की रक्षा हेतु वीरांगनाओं को जौहर करते देखा हैं।  इस देश ने बूढ़े बाप के कंधे पर जवान बेटे का जनाजा उठते देखा हैं । इस देश ने एक माँ , एक बहन , एक बेटी के साथ अत्याचार होते देखा हैं।  इस देश ने एक सुहागन का सुहाग उजड़ते देखा है।  इस देश ने बहुत कुछ देखा है , पर अब यह देश बहुत कुछ कहना चाहता है -  ये देश ,कुर्बानी नहीं मा...

अपनी असीमित क्षमता को जागृत करें

Image
दोस्तों  ! जन्म के साथ ही हम असीमित क्षमताओं से परिपूर्ण होते है। लेकिन हमारी यह क्षमताएं  क्या समय के साथ क्षीण हो जाती हैं ? नहीं । हम अपनी सोयी हुई क्षमताओं को कभी जागृत ही नहीं कर पाते , हम केवल वही कार्य करते हैं जो हमें सिखाया जाता है ।जैसे हमें निर्देश प्राप्त होते हैं । हम उसी दिशा में आगे बढ़ने लगते हैं क्योंकि समय तेजी से निकल जाता है और आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में, जो कुछ और सोचने के लिए रुक गया, वह पीछे रह जाता है । यह मेरा नहीं हमारे समाज हमारे परंपराओं का मानना है और इसी भागदौड़ के चक्कर में हम अपने क्षमताओं का अवमूल्यन करना भूल जाते हैं और ताउम्र जीवन के मायाजाल में संघर्ष करते रहते हैं।  ऐसा क्यों होता है ? इसलिए कि हमने कभी शांत चित्त से एकाग्र होकर चिंतन मनन नहीं किया। यदि किया होता तो हम जान पाते हैं कि हम कितनी असीम संभावनाओं से परिपूर्ण है । हम में समर्थ है , क्षमता है , सब कुछ पाने की । हासिल करने की।  ।।बशर्ते हम चाहे तो ।। एक सकारात्मक व्यक्ति के तौर पर हमें चाहिए कि लगातार उस चीज‌ का ‌ , लक्ष्य  का,‌ चिंतन करते रहे जो हम पाना चाहते है...